वित्त वर्ष 2025-26 (असेसमेंट ईयर 2026-27) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. टैक्सपेयर्स के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि रिटर्न भरते समय की गई छोटी सी लापरवाही भी बड़े नुकसान की वजह बन सकती है. गलतियों के कारण टैक्स नोटिस आना, रिफंड अटकना, ज्यादा टैक्स देनदारी बनना या भारी पेनल्टी लगना बेहद आम बात है.
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिटर्न सबमिट करने की जल्दबाजी करने से बेहतर है कि आप अपने फॉर्म 26AS, AIS (Annual Information Statement) और प्री-फिल्ड डेटा का अच्छी तरह मिलान कर लें. आइए जानते हैं उन प्रमुख गलतियों के बारे में जिनसे आपको हर हाल में बचना चाहिए:
1. गलत ITR फॉर्म का चुनाव करना
टैक्सपेयर्स के बीच यह सबसे आम गलतियों में से एक है. इनकम टैक्स विभाग अलग-अलग आय वर्ग और स्रोतों के हिसाब से ITR-1 से लेकर ITR-7 तक के फॉर्म उपलब्ध कराता है. अगर आप अपनी इनकम के अनुसार सही फॉर्म नहीं चुनते हैं, तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को डिफेक्टिव (Defective Return) मान सकता है. ऐसी स्थिति में आपकी प्रोसेसिंग रुक जाएगी और आपको दोबारा रिटर्न फाइल करने का नोटिस मिल सकता है.
2. सभी सोर्सेज से होने वाली आय को छिपाना
कई टैक्सपेयर्स को लगता है कि सिर्फ सैलरी से होने वाली इनकम ही रिटर्न में दिखानी होती है. वे बैंक अकाउंट से मिलने वाला ब्याज (Interest), कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड, मकान का किराया (Rental Income), फ्रीलांसिंग से हुई कमाई या शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट को छिपा लेते हैं. आज के समय में टैक्स विभाग के पास आपके हर फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन की सटीक जानकारी होती है, इसलिए आय छिपाने पर नोटिस आना तय है.
3. Form 26AS और AIS का मिलान न करना
रिटर्न फाइल करने से पहले अपने फॉर्म 16 (Form 16) का मिलान Form 26AS और AIS से जरूर करें. अगर आपके द्वारा घोषित आय और इन फॉर्म्स में दर्ज टैक्स डिडक्शन (TDS) या वित्तीय लेनदेन के आंकड़ों में जरा सा भी अंतर मिलता है, तो टैक्स विभाग इसे गलत रिपोर्टिंग (Mismatch) मानता है और स्पष्टीकरण मांग सकता है.
4. गलत डिडक्शन (Deductions) क्लेम करना
ज्यादा टैक्स बचाने के चक्कर में कुछ लोग ऐसे डिडक्शन या टैक्स छूट क्लेम कर लेते हैं, जिसके वे असल में हकदार नहीं होते या जिनके वैध दस्तावेज (जैसे- रेंट रसीद, मेडिकल बिल) उनके पास नहीं होते. इसके विपरीत, कई लोग हड़बड़ी में सही डिडक्शन क्लेम करना भूल जाते हैं. दोनों ही स्थितियां आपके वित्तीय पोर्टफोलियो को नुकसान पहुंचाती हैं.
5. कैपिटल गेन (Capital Gain) की गलत जानकारी
अगर आपने वित्त वर्ष के दौरान शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, सोना या कोई प्रॉपर्टी बेची है, तो उससे होने वाले मुनाफे या नुकसान (Capital Gain/Loss) की सही और सटीक जानकारी देना अनिवार्य है. इस डेटा को छिपाने या गलत भरने पर आयकर विभाग के ऑटोमेटेड सिस्टम तुरंत पकड़ लेते हैं और सीधे नोटिस जारी कर देते हैं.
6. विदेशी आय और एसेट्स (Foreign Assets) को न दिखाना
यदि आपके पास कोई विदेशी बैंक अकाउंट है, किसी विदेशी कंपनी के शेयर (जैसे- अमेरिकी शेयर) हैं, या विदेश से किसी भी तरह की कमाई हुई है, तो ITR में उसका खुलासा करना बेहद जरूरी है. ब्लैक मनी एक्ट और कड़े टैक्स नियमों के तहत विदेशी एसेट्स की जानकारी छिपाने पर भारी-भरकम पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है.
7. गलत टैक्स रिजीम (Tax Regime) चुनना
सरकार ने अब न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को डिफॉल्ट विकल्प बना दिया है. ऐसे में रिटर्न दाखिल करते समय आपको बहुत सावधानी से यह गणना करनी चाहिए कि आपके लिए ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) बेहतर है या न्यू. बिना सोचे-समझे किसी भी रिजीम को चुन लेने से आपकी