उत्तर प्रदेश में आजादी के बाद की 8वीं और देश की कुल 16वीं जनगणना की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं। आज, 2 मई 2026 को मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि राज्य में जनगणना का पहला चरण यानी 'हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO)' आगामी 22 मई से शुरू होने जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया अत्याधुनिक डिजिटल तकनीक पर आधारित होगी, जो देश के सांख्यिकीय इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगी।
सेल्फ एन्यूमरेशन: खुद भरें अपना डेटा
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता 'सेल्फ एन्यूमरेशन' (Self Enumeration) है। उत्तर प्रदेश के नागरिक 7 मई से 21 मई 2026 के बीच आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने परिवार और आवास की जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं। डेटा जमा करने के बाद एक विशिष्ट SE ID जनरेट होगा। जब 22 मई से 20 जून के बीच प्रगणक (Enumerator) आपके घर आएंगे, तो आपको केवल वह आईडी दिखाना होगा, जिससे समय की बचत होगी और डेटा की सटीकता बढ़ेगी।
दो चरणों में संपन्न होगी प्रक्रिया
- प्रथम चरण (22 मई - 20 जून 2026): इसमें केवल मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं (जैसे पानी, बिजली, शौचालय) और संपत्ति (जैसे वाहन, टीवी) से संबंधित 33 सवाल पूछे जाएंगे। इस चरण में व्यक्तिगत जानकारी जैसे धर्म या जाति नहीं पूछी जाएगी।
- द्वितीय चरण (फरवरी 2027): मुख्य 'जनसंख्या गणना' फरवरी 2027 में होगी। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की साक्षरता, व्यवसाय और इस बार विशेष रूप से जाति आधारित डेटा (Caste Census) भी संकलित किया जाएगा।
सुरक्षा और गोपनीयता का वादा
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में लगभग 5.25 लाख कर्मचारी इस विशाल अभियान में तैनात किए गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि एकत्रित किया गया डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। इसका उपयोग किसी कानूनी कार्यवाही या टैक्स जांच के लिए नहीं, बल्कि केवल भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्धारण के लिए किया जाएगा। मोबाइल ऐप के माध्यम से यह गणना ऑफलाइन मोड में भी संभव होगी, जिससे कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी काम नहीं रुकेगा।