रूस के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों भारी हलचल और बेचैनी का माहौल है। यूरोपीय खुफिया एजेंसियों की हालिया रिपोर्टों ने सनसनी फैला दी है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के खिलाफ आंतरिक विद्रोह या तख्तापलट की साजिश रची जा रही है। इस खतरे को देखते हुए क्रेमलिन ने राष्ट्रपति की सुरक्षा को अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है, जो किसी 'डिजिटल और भौतिक लॉकडाउन' से कम नहीं है।
करीबियों पर भी शक का साया
रिपोर्ट के अनुसार, अब केवल बाहरी दुश्मन ही नहीं, बल्कि पुतिन के बेहद करीबी कर्मचारियों को भी संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है। राष्ट्रपति के रसोइयों, फोटोग्राफरों और अंगरक्षकों के निजी जीवन पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। इन कर्मचारियों के घरों में विशेष जासूसी उपकरण लगाए गए हैं और उन्हें सार्वजनिक परिवहन (बस या ट्रेन) के इस्तेमाल की सख्त मनाही है। साथ ही, उन्हें केवल ऐसे फोन उपयोग करने की अनुमति है जिनमें इंटरनेट न हो, ताकि किसी भी प्रकार की डेटा लीक या बाहरी संपर्क की संभावना को खत्म किया जा सके।
शीर्ष जनरलों की हत्या और आंतरिक कलह
सुरक्षा में इस भारी इजाफे का मुख्य कारण पिछले कुछ महीनों में रूस के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों की रहस्यमय हत्याएं मानी जा रही हैं। दिसंबर में एक हाई-प्रोफाइल जनरल की हत्या ने क्रेमलिन के सुरक्षा तंत्र की खामियों को उजागर कर दिया था। इसके बाद से ही पुतिन ने अपनी सार्वजनिक गतिविधियों को न्यूनतम कर दिया है। उन्होंने अपने पसंदीदा ग्रीष्मकालीन निवास 'वाल्दाई' और मॉस्को के उपनगरीय आवासों पर जाना बंद कर दिया है, क्योंकि वहां ड्रोन या मिसाइल हमलों का खतरा महसूस किया जा रहा है।
चुनौतियों से घिरा नेतृत्व
यूक्रेन युद्ध में मिल रही चुनौतियों और देश के भीतर गहराते आर्थिक संकट ने पुतिन के विरोधियों को सक्रिय कर दिया है। खुफिया विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के भीतर एक ऐसा गुट तैयार हो रहा है जो सत्ता परिवर्तन की फिराक में है। इन परिस्थितियों में पुतिन की सुरक्षा को अभेद्य बनाना क्रेमलिन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है, ताकि किसी भी संभावित सैन्य विद्रोह या हत्या के प्रयास को विफल किया जा सके।